जब था बचपन
तब था सचपन
थी वो गलियां
था वो आँगन ,
ना सूनापन
बस चंचल मन
वो अपनापन
अपना जीवन
ना थी हलचल
ना उथलपुथल
ना कोलाहल
बस अपनी चल ,
पाया वह सब
जब जी गया मचल
अपनी बातें , अपनी रातें ,
अपना सबकुछ , सब थे अपने
अब है यौवन
थोडी अनबन
कुछ सूनापन
कुछ अपनापन
है उथलपुथल ,
अब भटक रहा मन
दिखता मधुबन
सारा जीवन
Thursday, March 5, 2009
Friday, February 13, 2009
Thursday, February 12, 2009
घड़ी
हाँ , आपने घड़ी देखी है ,
मैंने भी देखी है ,
आपने घड़ी में सिर्फ़ समय देखा है ,
लेकिन मैंने
घड़ी में बहुत कुछ देखा है ,
मैंने घड़ी में देखा है - एक परिवार |
घड़ी में - सेकंड का काटा है - बच्चे ,
मिनिट का काटा याने बड़ा काटा है - पति
घंटे का काटा याने छोटा काटा है - पत्नी
ये काटे नही तो घड़ी नही|
सेकंड का काटा बच्चों की तरह फुदकता रहता है ,
सेकंड का काटा ना हो तो भी घड़ी रहती है ,
हाँ, लेकिन हर क्षण को नही जाना जा सकता है|
बड़ा काटा पूरा एक चक्कर लगाता है,
तब छोटा काटा एक कदम चलता है ,
लेकिन यह भी सही- है कि छोटे काटे बगैर घड़ी का कोई महत्त्व नही है ,
क्योंकि जब कोई समय पूछता है,
तो हम पहले देखते है कि - छोटा काटा कितने पर है!
बड़ा काटा दिन भर छोटे काटे का चक्कर लगाता है ,
लेकिन यदि छोटा काटा रुक गया या बिगड़ गया तो आपका समय ख़राब |
मैंने भी देखी है ,
आपने घड़ी में सिर्फ़ समय देखा है ,
लेकिन मैंने
घड़ी में बहुत कुछ देखा है ,
मैंने घड़ी में देखा है - एक परिवार |
घड़ी में - सेकंड का काटा है - बच्चे ,
मिनिट का काटा याने बड़ा काटा है - पति
घंटे का काटा याने छोटा काटा है - पत्नी
ये काटे नही तो घड़ी नही|
सेकंड का काटा बच्चों की तरह फुदकता रहता है ,
सेकंड का काटा ना हो तो भी घड़ी रहती है ,
हाँ, लेकिन हर क्षण को नही जाना जा सकता है|
बड़ा काटा पूरा एक चक्कर लगाता है,
तब छोटा काटा एक कदम चलता है ,
लेकिन यह भी सही- है कि छोटे काटे बगैर घड़ी का कोई महत्त्व नही है ,
क्योंकि जब कोई समय पूछता है,
तो हम पहले देखते है कि - छोटा काटा कितने पर है!
बड़ा काटा दिन भर छोटे काटे का चक्कर लगाता है ,
लेकिन यदि छोटा काटा रुक गया या बिगड़ गया तो आपका समय ख़राब |
Wednesday, February 11, 2009
विचित्र वर्गीकरण
जिंदगी --------
उदास, विचित्र, शुन्य ---किसी के लिए |
सरल , उज्जवल---किसी के लिए |
कुछ भी नही--- किसी के लिए |
सब कुछ--- किसी के लिए |
मौत----------
एक समान सब के लिए |
उदास, विचित्र, शुन्य ---किसी के लिए |
सरल , उज्जवल---किसी के लिए |
कुछ भी नही--- किसी के लिए |
सब कुछ--- किसी के लिए |
मौत----------
एक समान सब के लिए |
पहला कदम
सभी को सादर नमन ,
कई वर्षों से सोचता हूँ लिखूं ,लेकिन लिख नही पाया,
जाने कैसे मेरी बहनों ने कर दिखाया,
अब मै भी शरमाया ,छोडी हया व लिखने आया,
इतना लिखने मे ही बहुत मजा आया|
अब समझ में आया , थोड़ा सा दिमाग लगाया और लिखना आया ,
इसमे मुझे किसी ने नही समझाया ,जो लिखा अपने आप आया
चलो अब इसी में संतोष है की आज कुछ तो पाया|
कई वर्षों से सोचता हूँ लिखूं ,लेकिन लिख नही पाया,
जाने कैसे मेरी बहनों ने कर दिखाया,
अब मै भी शरमाया ,छोडी हया व लिखने आया,
इतना लिखने मे ही बहुत मजा आया|
अब समझ में आया , थोड़ा सा दिमाग लगाया और लिखना आया ,
इसमे मुझे किसी ने नही समझाया ,जो लिखा अपने आप आया
चलो अब इसी में संतोष है की आज कुछ तो पाया|
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